जब से चाहा तुझको मोहन | अंकित त्रिवेदी | Jab Se Chaha Tujhko Mohan | Sanskar Bhajan
जब से चाहा तुझको मोहन रही न मन में कोई कमानाक्या करती मैं जग के साधन मन में जब बस गई साधनानषर है जब सारी दुनिया तो दुनिया किस काम कीमैं...
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