गोपी विरह : ब्रज गोपियों से ना निंदिया चुराना/रचना : दासानुदास श्रीकान्त दास जी महाराज/स्वर:आलोक जी
गोपी विरह गीत :व्रज गोपियों से ना निंदिया चुराना ।ब्रज गोपियों से ना निंदिया चुराना ।ब्रज गोपियों का है प्रेम पुराना ।।
आज से सूनीं ...
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