एक नया भजन एक बार वृंदावन जाना पै गया मैं तो मुड़ आई दिल जगमोहन शास्त्री महाराज राधा माधव मुक्तिबोध
इक वारी, वृंदावन, जाना पै गया॥मैं तां, मुर आਈ दिल, ओथੇ रहि गया॥ओ राधे राधे... मैनूं श्याम मिला दे...॥
राधे राधे बोलण, नर नारियां॥वृं...
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