क्या वह स्वभाव पहला सरकार अब नही है। रूपेश चौधरी। भजन।महाकवि बिंदु जी।7004825279,7631601095
क्या वह स्वभाव पहला सरकार अब नहीं है।दीनों के वास्ते क्या दरबार अब नहीं है।
या तो दयालु मेरी दृढ़ दीनता नहीं है।या दीन की तुम्हें ही...
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